गुरुवार, 9 अक्तूबर 2014

navgeet: rama padharo

नवगीत:
पधारो,
रमा! पधारो
ऊषा से
ले ताजगी
सरसिज से
ले गंध
महाकाल से
अभय हो
सत-शुभ से
अनुबंध
निहारो,
सदय निहारो
*
मातु! गुँजा दो
सृष्टि में शाश्वत
अनहद नाद
विधि-हरि-हर
रिधि-सिद्धि संग
सुन मेरी फरियाद
विराजो!
विहँस विराजो
*
शक्ति-शारदा
अमावस
पूनम जैसे साथ
सत-चित-आनंद
वर सके
सत-शिव-सुंदर पाथ
सँवारो
जन्म सँवारो
*

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